पुनः निर्धारण कार्यवाही
पुनः निर्धारण कार्यवाही पूछे जाने वाले प्रश्न
1. आयकर अधिनियम, 2025 के तहत पुनः खोलने की सूचना जारी करने की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन करें।
आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 280 के तहत सूचना जारी करने की प्रक्रिया, जहां संबंधित कर वर्ष के लिए आय कर निर्धारण से छूट गई है, निम्नानुसार संक्षिप्त रूप से दी गई है :
i) सूचना - निर्धारण अधिकारी के पास ऐसी सूचना होनी चाहिए जिससे यह संकेत मिलता हो कि आय निर्धारण से छूट गई है।
ii) कारण बताओ सूचना - अधिनियम की धारा 280 के तहत सूचना जारी करने से पूर्व, निर्धारण अधिकारी को नए अधिनियम की धारा 281(1) के तहत कारण बताओ सूचना जारी करके निर्धारिती को सुनवाई का अवसर प्रदान करना होगा, जिसमें ऐसी सूचना दी जाएगी जिससे यह संकेत मिलता हो कि कर योग्य आय का निर्धारण नहीं हो पाया है और साथ ही तथा निर्धारित समय के भीतर उत्तर देने का अवसर दिया जाएगा।
iii) उत्तर पर विचार - निर्धारण अधिकारी को निर्धारिती द्वारा दिए गए उत्तर पर विचार करना होगा।
iv) कारणयुक्त आदेश - अतिरिक्त आयुक्त अथवा संयुक्त आयुक्त की पूर्व स्वीकृति से धारा 281(3) के तहत यह निर्णय लेते हुए आदेश पारित किया जाएगा कि मामला पुनःनिर्धारण के लिए उपयुक्त है या नहीं।
v) अधिनियम की धारा 280 के तहत पुनः खोलने की सूचना जारी करना। नोट : अधिनियम की धारा 281(4) में बताए गए कुछ परिस्थितियों में निर्धारण अधिकारी को अधिनियम की धारा 281 में प्रदान की गई प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक नहीं है। तथापि, ऐसे मामलों में भी धारा 280 के तहत सूचना जारी करने से पूर्व अतिरिक्त आयुक्त अथवा संयुक्त आयुक्त की स्वीकृति अनिवार्य है।
2. नए अधिनियम के तहत निर्धारण को पुनः खोलने के प्रयोजनों के लिए, ‘ऐसी सूचना जिससे यह संकेत मिलता हो कि आय निर्धारण से छूट गई है’ से क्या अभिप्राय है?
अधिनियम की धारा 280(6) में प्रावधान है कि निम्नलिखित को ऐसी सूचना माना जाएगा जिससे यह संकेत मिलता हो कि आय निर्धारण से छूट गई है:
(i) सुसंगत वर्ष के लिए बोर्ड की जोखिम प्रबंधन रणनीति के तहत पहचानी गई सूचना।
(ii) लेखा-परीक्षा आपत्तियाँ, जिनसे यह संकेत मिलता हो कि निर्धारण अधिनियम के अनुसार नहीं किया गया था।
(iii) अधिनियम की धारा 159 में निर्दिष्ट किसी विदेशी देश अथवा निर्दिष्ट क्षेत्र की सरकार के साथ किए गए किसी समझौते के तहत प्राप्त सूचना।
(iv) सूचना संग्रहण (इकट्ठा करने) के प्रयोजनों के लिए अधिनियम की धारा 260 के तहत अधिसूचित किसी योजना के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी को उपलब्ध कराई गई सूचना।
(v) ऐसी सूचना जिसके परिणामस्वरूप अधिकरण अथवा न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई अपेक्षित हो।
(vi) धारा 253 के तहत किए गए सर्वेक्षणों (उप-धारा 4 को छोड़कर) से प्राप्त सूचना।
(vii) धारा 274(6) के तहत अनुमोदन पैनल द्वारा दिए गए निर्देश।
(viii) आयकर अधिनियम, 2025 के तहत कार्यवाहियों में किसी प्राधिकारी, अधिकरण अथवा न्यायालय द्वारा पारित आदेश में निहित निष्कर्ष या निर्देश, अथवा किसी अन्य कानून के तहत कार्यवाहियों में किसी न्यायालय द्वारा दिए गए निष्कर्ष या निर्देश।
3. क्या निर्धारण अधिकारी नए अधिनियम की धारा 280 के तहत निर्धारिती को सूचना जारी किए बिना कोई निर्धारण, पुनर्निर्धारण अथवा पुनर्गणना कर सकता है?
नहीं, निर्धारण अधिकारी आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 के समतुल्य नई अधिनियम की धारा 280 के तहत सूचना जारी किए बिना धारा 279 के तहत कोई निर्धारण, पुन:र्निर्धारण अथवा पुनः संगणना नहीं करेगा।
4. किन विशिष्ट परिस्थितियों में निर्धारण अधिकारी को नए अधिनियम की धारा 280 के तहत सूचना जारी करने से पूर्व धारा 281 के तहत प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक नहीं है?
नए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, सामान्यतः निर्धारण अधिकारी धारा 281 में निर्धारित प्रक्रिया को पूर्ण करेगा तथा धारा 281(3) के तहत आदेश के साथ धारा 280 के तहत सूचना जारी करेगा। हालाँकि, ऐसे मामलों में जहाँ निर्धारण अधिकारी को निम्न प्रकार की सूचना प्राप्त हुई हो, वह धारा 281 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करेगा :
(i) नई अधिनियम की धारा 260 के तहत अधिसूचित सूचना के फेसलेस संग्रहण की योजना के तहत सूचना; अथवा
(ii) अध्याय XI के प्रावधानों के अनुसार किसी व्यवस्था को अवैध परिहार व्यवस्था घोषित किए जाने के संबंध में अनुमोदन पैनल द्वारा धारा 274(6) के तहत जारी निर्देश, जिनमें यह निर्दिष्ट किया गया हो कि ऐसी व्यवस्था को अवैध परिहार व्यवस्था घोषित किया जाना किन कर वर्ष अथवा वर्षों पर लागू होगा; अथवा
(iii) इस अधिनियम के अंतर्गत किसी अपील, निर्देश अथवा पुनरीक्षण के माध्यम से किसी कार्यवाही में किसी प्राधिकारी, अधिकरण अथवा न्यायालय द्वारा पारित आदेश में निहित किसी निष्कर्ष अथवा निदेश, या किसी अन्य विधि के अंतर्गत किसी कार्यवाही में किसी न्यायालय द्वारा दिया गया कोई निष्कर्ष अथवा निर्देश।
5. नए अधिनियम के पुनः निर्धारण प्रावधान किन कर वर्षों पर लागू होंगे?
आयकर अधिनियम, 2025 के पुनः निर्धारण प्रावधान (धारा 279 - 286) कर वर्ष 2026-27 तथा उसके पश्चात के कर वर्षों पर लागू होंगे। 1 अप्रैल, 2026 से पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी भी कर वर्ष के लिए पुनः निर्धारण हेतु केवल पुराने अधिनियम के प्रावधान ही लागू होंगे।
6. आयकर अधिनियम, 2025 के तहत पुनः निर्धारण की पूर्णता के लिए समय-सीमा क्या है?
धारा 286(1) [तालिका: क्रमांक 4] के अनुसार धारा 279 के तहत पुनः निर्धारण आदेश उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से एक वर्ष के भीतर पारित किया जाना चाहिए, जिसमें धारा 280 के तहत सूचना की तामील की गई थी। विभिन्न विनिर्दिष्ट परिस्थितियों (जैसे, ट्रांसफर प्राइसिंग निर्देश, आई.टी.ए.टी./न्यायालय द्वारा रोक संबंधी आदेश आदि) के लिए विभिन्न विस्तार एवं अपवाद प्रदान किए गए हैं ।
7. यदि किसी पूर्व निर्धारण वर्ष के लिए पुनः निर्धारण कार्यवाही पुराने अधिनियम की धारा 147/148 के तहत प्रारंभ की गई थी तथा 01.04.2026 तक लंबित है, तो क्या वह पुराने अधिनियम के तहत ही जारी रहेगी?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c) में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि नए अधिनियम के प्रारम्भ की तिथि पर लंबित किसी भी कार्यवाही पर निरसित अधिनियम के प्रावधान लागू होते रहेंगे। अतः पुराने अधिनियम के तहत पहले से प्रारंभ की गई पुनः निर्धारण कार्यवाहियाँ आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों द्वारा ही नियंत्रित होती रहेंगी। उदाहरण: निर्धारण अधिकारी ने श्री X को निर्धारण वर्ष 2023-24 के लिए दिसंबर 2025 में पुराने अधिनियम की धारा 148A(1) के तहत सूचना जारी की इसके तत्पश्चात फरवरी 2026 में धारा 148 के तहत सूचना जारी की। पुनः निर्धारण पुराने अधिनियम के तहत ही पूरा किया जाएगा, भले ही निर्धारण आदेश 01.04.2026 के बाद पारित किया जाए।
8. क्या 01.04.2026 के पश्चात आयकर विभाग पुराने अधिनियम के तहत पूर्व निर्धारण वर्षों (जैसे निर्धारण वर्ष 2022-23 अथवा निर्धारण वर्ष 2024-25) के लिए नई पुनः निर्धारण कार्यवाही आरंभ कर सकता है?
हाँ, 1 अप्रैल 2026 के पश्चात भी पूर्व निर्धारण वर्षों के लिए निर्धारण वर्ष 2026-27 तक, पुराने अधिनियम के तहत निर्धारण, पुनर्निर्धारण, परिशोधन, दंड, पुनरीक्षण आदि जैसी कार्यवाहियाँ आरंभ तथा पूर्ण की जा सकती हैं। उदाहरणार्थ, वित्तीय वर्ष 2027-28 में विभाग निर्धारण वर्ष 2023-24 के लिए पुराने अधिनियम के तहत निर्धारण को पुनः खोल सकता है, यदि आयकर अधिनियम, 1961 में निर्दिष्ट पुनः खोलने से संबंधित शर्तें पूर्ण होती हैं।
9. यदि पुराने अधिनियम की धारा 148A(1) के तहत नोटिस 01.04.2026 से पूर्व जारी किया गया था, किंतु धारा 148 के तहत नोटिस अभी जारी किया जाना शेष है, तो क्या उसे 01.04.2026 के पश्चात जारी किया जा सकता है?
हाँ। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 536(2)(c) में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि निरसित अधिनियम के प्रावधान नए अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि पर लंबित किसी भी कार्यवाही पर लागू होते रहेंगे। चूँकि कार्यवाही आयकर अधिनियम, 1961 के तहत धारा 148A(1) के अंतर्गत नोटिस जारी करके प्रारंभ की गई थी, इसलिए परिणामी कार्रवाइयों का पूरा क्रम — जिसमें धारा 148A(3) के तहत आदेश तथा धारा 148 के तहत नोटिस शामिल हैं — 1961 अधिनियम के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होगा। तथापि, ऐसी निरंतरता आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 149 के तहत विनिर्दिष्ट समय-सीमा के अनुपालन के अधीन होगी। उदाहरण: निर्धारण अधिकारी (ए.ओ.) ने निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए किसी करदाता को 20 मार्च, 2026 को धारा 148A(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया। उसके उत्तर पर विचार करने के पश्चात, ए.ओ. ने 15 अप्रैल, 2026 को धारा 148A(3) के तहत आदेश पारित किया तथा 30 अप्रैल, 2026 को पुराने अधिनियम की धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया। नए अधिनियम 1 अप्रैल, 2026 से प्रारंभ होने के बावजूद ये सभी कार्रवाइयाँ वैध होंगी।
10. 01.04.2026 से नए अधिनियम के लागू होने के पश्चात, निर्धारण वर्ष 2026-27 अथवा किसी पूर्व निर्धारण वर्ष के लिए पुनःनिर्धारण नोटिस जारी करने के लिए किसकी स्वीकृति आवश्यक होगी?
चूँकि निर्धारण वर्ष 2026-27 अथवा उससे पूर्व के किसी भी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारण कार्यवाही पुराने अधिनियम द्वारा शासित होती है, इसलिए पुराने अधिनियम की धारा 151 में निर्दिष्ट अनुमोदन पदानुक्रम लागू होगा और इस कारण आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 तथा 148A के प्रयोजनों के लिए अतिरिक्त आयुक्त, अपर निदेशक, संयुक्त आयुक्त अथवा संयुक्त निदेशक निर्दिष्ट प्राधिकारी होंगे।
11. यदि पुराने अधिनियम की धारा 148 के तहत निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए फरवरी 2026 में पुन:र्निर्धारण नोटिस जारी किया गया था, और निर्धारिती ने अभी तक उसके प्रत्युत्तर में विवरणी प्रस्तुत नहीं की है, तो क्या 01.04.2026 के बाद विवरणी प्रस्तुत की जा सकती है?
हाँ। चूँकि संपूर्ण पुन:र्निर्धारण कार्यवाही पुरानी अधिनियम द्वारा शासित है (धारा 536(2)(c) के अनुसार), इसलिए निर्धारिती को धारा 148 की सूचना के प्रत्युत्तर में पुराने अधिनियम की रूपरेखा के तहत, सूचना में निर्दिष्ट समयावधि के भीतर, जो धारा 148 के तहत सूचना जारी किए जाने वाले माह की समाप्ति से तीन माह से अधिक नहीं होगी, विवरणी प्रस्तुत करनी होगी। जिस फ़ॉर्म में आई.टी.आर. दाखिल की जानी है, वह आयकर अधिनियम, 1961 के अनुरूप होगी।
12. क्या निर्धारण अधिकारी एक ही निर्धारिती के लिए निर्धारण वर्ष 2024-25 (पुराने अधिनियम के तहत) के पुन:र्निर्धारण तथा कर वर्ष 2026-27 (नए अधिनियम के तहत) के निर्धारण का संचालन एक साथ कर सकता है?
हाँ। ये दो भिन्न आय अवधियों के लिए दो अलग-अलग अधिनियमों के तहत स्वतंत्र कार्यवाहियाँ हैं। विभाग आवश्यकता होने पर समानांतर कार्यवाहियाँ चला सकता है। निर्धारण वर्ष 2024-25 के पुन:र्निर्धारण की कार्यवाही पुराने अधिनियम द्वारा नियंत्रित होगी, जबकि कर वर्ष 2026-27 की निर्धारण कार्यवाही नए अधिनियम द्वारा नियंत्रित होगी।
13. 1 अप्रैल, 2026 से पूर्व आरंभ होने वाले किसी भी कर वर्ष से संबंधित दंड कार्यवाहियों को कौन-सा अधिनियम नियंत्रित करेगा?
धारा 536(2)(d) स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि 1 अप्रैल, 2026 से पूर्व आरंभ होने वाले किसी भी कर वर्ष के लिए दंड अधिरोपण की कोई भी कार्यवाही पुराने अधिनियम के तहत प्रारंभ की जा सकती है तथा दंड अधिरोपित किया जा सकता है, मानो नया अधिनियम अधिनियमित ही न हुआ हो। अतः, पूर्ववर्ती वर्षों के पुनर्निर्धारण से उत्पन्न होने वाले दंड मामलों पर आयकर अधिनियम, 1961 में निर्धारित दंड संबंधी प्रावधान ही लागू होंगे।